इस स्लोगन को देखा,पढ़ा और सोचा तो क्यों न अपनी श्रद्धांजली सभा ही आयोजित कर ली जाये। क्योंकि बाद मे कौन मेरे बारे मे क्या कहेगा मुझे कैसे पता चलेगा?वैसे यह विचार मेरा खुद का मौलिक नहीं है। आर्यसमाज,कमलनगर-बलकेशवर,आगरा मे जब पांचवा रविवार पड़ता था तो एक सन्यासी -स्वामी स्वरूपानन्द जी प्रवचन देने आते थे वह अक्सर प्रबन्धकों से यही निवेदन करते थे कि उनके जीते जी उनकी श्रद्धांजली सभा आयोजित कर दें जिससे वह भी जान सकें कि उन्हें

Rani Rupmati Pavilion at Mandu, built by Miyan...

Rani Rupmati Pavilion at Mandu,