१- प्याज की परतों के जैसे दिल के राज़ न खोलिए
रिश्तों को जो डगमगा दे ऐसा सच न बोलिए
बोलने को बोल सकते हैं किसी भी सत्य को
पर चंद सिक्कों के लिए खुद का वजूद न तौलिए ||
२- बात बिकती ,राज़ बिकते ,सिर्फ सच के नाम पर
देह बिकती ,रिश्ते बिकते ,सिर्फ सच के नाम पर
अब तो बस यह तुम पे है क्या चाहते हो बेंचना
आबरू या ज़मीर को सिर्फ सच के नाम पर || दिव्या
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