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"आप"-लिखने नहीं देते
लिखूं तब,जब ज़हन से हटें कहीं
हटना तो दूर
हटने की अर्ज़ी भी नहीं लेते, "आप"
लिखने नहीं देते।
आगोश से छोड़ें गर,तो ही भला लिखूं
बाहों को तेज़ जकड़ देते हैं, "आप"
लिखने नहीं देते।
सोचती हूँ नींद के आँचल तले लिखूंगी
गलती से भी तन्हा होने नहीं देते, "आप'
लिखने नहीं देते।
श्रद्धा नमन से होती है जब आँख बंद
जोड़ हथेलियाँ मेरी,"आप'
लिखने नहीं देते।
नश्वर संसार, लिखोगी भला क्या
इक "मै" ही सत्य कह, "आप"
लिखने नहीं देते।
मै ही समाया हूँ तुझमे सदा
"आत्मा"से अपनी हटने नहीं देते,"आप"
लिखने नहीं देते।
दिव्या
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