कब होगी हर नारी आजाद
आज, कल या कल के बाद।
हर श्वास में उसकी है ये कैसी वेदना
क्यों जग चाहे उसकी आशाएं भेदना।
वे कहते हैं नारी जगत-जननी
रह गई जो केवल एक मां या एक पत्नी।
हां! यह सत्य है कि नारी महान है
पर आज जिसकी तलाश है वह उसकी पहचान है।
नारी वो जो सूर्य-सी उदय हो
वो जिसके हृदय में धूप का ज्वालाकण हो।
शीत की हर लहर से अनछुई रह जाए
इतना ताप उसमें उत्पन्न हो।
साहिल मंडले (कक्षा-सातवीं)
कब होगी हर नारी आजाद
आज, कल या कल के बाद।
हर श्वास में उसकी है ये कैसी वेदना
क्यों जग चाहे उसकी आशाएं भेदना।
वे कहते हैं नारी जगत-जननी
रह गई जो केवल एक मां या एक पत्नी।
हां! यह सत्य है कि नारी महान है
पर आज जिसकी तलाश है वह उसकी पहचान है।
नारी वो जो सूर्य-सी उदय हो
वो जिसके हृदय में धूप का ज्वालाकण हो।
शीत की हर लहर से अनछुई रह जाए
इतना ताप उसमें उत्पन्न हो।
साहिल मंडले (कक्षा-सातवीं)
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