प्यारी थी वह सुबह हंसती-हंसाती,
चिड़िया, मैना, कोयल थी गुनगुनाती।

रोज सुबह नहलाकर मंदिर ले जाती दादी,
कहानियों में ही सुनी थी राजा-रानी की शादी।

हर त्योहार मनाना चाहे दशहरा या हो रमजान,
हर फिल्म देखना चाहे हैरी पॉटर हो या हनुमान।

लाल सूरज सफेद चांद तो है धरती की शान,
टीचर-मम्मी-पापा तो हैं दुआओं की खदान।

धीरे-धीरे गुम हो रहा है हमारा बचपन,
हम कभी न भूल पाएंगे चाहे उम्र हो जाए पचपन।

नहीं भूल पाएंगे मस्ती का वो सिकंदर,
बचपन तो अभी भी है हम सबके अंदर।

बचपन तो जिंदा है हम सबमें अभी भी,
क्योंकि किसी ने सही कहा है दिल तो बच्चा है जी।