लव मैरिज में तो प्यार करने वाले कपल आपसी समझ, प्यार व विश्वास के आधार पर घर बसाने का निर्णय लेते हैं, लेकिन अरेंज मैरिज में लड़का-लड़की से महत्वपूर्ण हो जाते हैं उनके अभिभावक, दोस्त या रिश्तेदार। पुराने जमाने में और आज भी पैरेंटस अपने बच्चों के लिए जीवनसाथी की तलाश करते थे।
इसमें नाई, पंडित या किसी बिचौलिए की मुख्य भूमिका होती थी। समय बदला और लड़के-लड़की को मिलाने का काम अखबार के मैट्रिमोनिशल विज्ञापनों और शादी डॉट कॉम जैसे पोर्टलों के जिम्मे आ गया। लेकिन अखबार के विज्ञापन और शादी डॉट कॉम जैसे पोर्टलों ने अचानक गहरी दोस्ती को मजबूत बना दिया।
लड़का-लड़की एक-दूसरे से मिलने से पहले दोस्तों से इस बारे में पूछताछ करने लगे और पहली बार मिलने में दोस्तों को भी साथ ले जाने लगे। जीवनसाथी ढूंढ़ने के मामले में पहले की अपेक्षा दोस्त अधिक महत्वपूर्ण हो गए।
यही नहीं, गर्लफ्रेंड व ब्वॉयफ्रेड बनाने में भी नजदीकी दोस्तों की पसंद और उनकी राय महत्वपूर्ण हो उठी है। आआखिर एक दोस्त दूसरे दोस्त की सूझबूझ व समझ में ऐसा क्या देखता जो अपने जीवन का फैसला उन पर छोड़ दिया। विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर जो निष्कर्ष निकला है, वह कुछ इस प्रकार है-
- अधिकांश युवा अपने पेरेंट्स की अपेक्षा हमउम्र दोस्तों और कजन के ज्यादा करीब होते हैं ऐसे में परिवार वालों की अपेक्षा दोस्तों को पसंद नापसंद के बारे में ज्यादा अच्छे तरीके से पता होता है।
- दोस्तों को पता होता है कि उसके दोस्त को किस तरह के पार्टनर की जरूरत है या फिर किसके साथ वो ज्यादा अच्छे तरीके से और खुशी से जीवन बिता सकते हैं।
- दोस्ती में सबकुछ चलता है इस वजह से युवा अपने दोस्तों से सबकुछ साझा करते हैं अगर दोस्त किसी को पसंद किया है और वह सही नहीं लग रहा है तो उसे आसानी से मना कर सकते हैं लेकिन परिवारवालों के सामने मना करना आसान नहीं है।
- दोस्त किसी को लंबे समय तक देखने-जांचने परखने के बाद ही दोस्त के लिए पसंद करते है लेकिन परिवार वाले लड़के या लड़कियों की अच्छी जॉब सुनकर उन पर और उनके परिवारवालों पर भरोसा कर लेते हैं।
- अगर बात गर्लफ्रेंड friend और ब्यॉय friend तलाशने की आती है तो इसके लिए दोस्तों से अच्छा कोई और विकल्प है ही नहीं क्योंकि कोई भी युवा अपने पेरेंट्स से ये बात कहना उचित नहीं समझता है।
- अकसर ब्यॉय friend या गर्ल friend बनाने में दोस्तों के तजुर्बे काम आते हैं । अगर कोई लड़की या लड़का पहली बार किसी को ब्यॉय friend या गर्ल friend बनाना चाहते हैं तो ऐसे में उनेक वो दोस्त सबसे ज्यादा मदद करते हैं जिनके पहले से ब्यॉय friend या गर्ल friend है।
- ·दोस्तों का सर्किल बहुत बड़ा होता है ऐसे में कई बार दोस्त के दोस्त के बारे में नहीं जानते हैं लेकिन उनसे मिलने पर बात बहुत दूर तलक चली जाती है और ये काम आपके दोस्त ही कराते हैं।
- अकसर कोई भी युवा किसी को प्रपोज करने में हिचकिचाते हैं ऐेसे में हमेशा से दोस्त ही मदद करते आए हैं और अभी भी बात जब किसी को प्रपोज करने की या नजदीकियां बढ़ाने की आती है तो इस काम के लिए सबसे उपयुक्त आदमी के रुप में दोस्त ही नज़र आते हैं।
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