facebook

साँवरिया काहे को इतना मुस्काए,
हर मुस्कान पे तेरी राधा मिट जाये ।

ओढ़ ली चुनरिया भी नाम की तेरे
बस तेरी ही धुन, है पाजेब गाये ।

तू करे दिल लगी ,गोपियों के संग
क्यूँ न दिल राधा का धड़का जाए।

तू रहे संग महल में,जब किसी और के
इस दर्द को भी राधा बिन प्यास पी जाए।

इक तेरे ह्रदय से जब नाम निकले राधे !
उन निकली साँसों में है राधा,जी जाये ।

साँवरिया काहे को इतना मुस्काए
राधे के होठों की ,प्यास बढ़ जाए ।