English: Flying Fox, also called Zip Line, ove...

 हिन्दी: घाटी को फ्लाइयिंग फॉक्स, या ज़िप लाइन, से पार करती हुई महिला - महरांगर्ह फ़ोर्ट (जोधपुर) के अंदर (Photo credit: DIVYA)

बचपन में मां एक राजकुमारी की कहानी सुनाया करती थी. जिसमें एक शाप के कारण राजकुमारी को अनाथ नौकरानी का जीवन जीना पड़ता है. राजकुमारी अक्सर रोती-बिसूरती रहती है, फिर एक दिन अचानक उसकी लाइफ बदलती है और एक राजकुमार उसे ढूंढता हुआ आता है और राजकुमारी से ब्याह कर अपने साथ ले जाता है……कहीं न कहीं बचपन से हर लड़की इस राजकुमारी की कहानी को अपना समझ इंतजार कर रही होती हैं उस राजकुमार का. उसे लगता है कि अचानक इंतजार खत्म होगा और एक दिन सचमुच कोई राजकुमार उन्हें अपने साथ ले जाएगा. खैर सपने-सपने ही रह जाते हैं बढ़ती उम्र के साथ यह सपने मन के किसी कोने में दबे रहते हैं और वास्तविक जिंदगी का राजकुमार हमारी लाइफ में आ जाता है. अपने मां-बाप के स्नेह की छांव से निकलकर लड़की अपने इस हमसफर के साथ नई जिंदगी की शुरुआत करती है. इस शख्स को वह पहचानती नहीं और न ही उसे जानने का दावा करती है, बावजूद इसके वह खुद को इस स्नेह संबंध के लिए पूरी तरह समर्पित कर देती है. यह राजकुमार लड़की के सपनों के विपरीत भी हुआ तो भी लड़की उसे दिल से स्वीकारती है. वह बस अपना प्यार देना चाहती है. पहले अपने पैरेंट्स और भाई-बहन को, फिर अपने पति को और फिर अपने बच्चों को…..इस पूरी जिंदगी को वह कुछ इसी तरह प्यार के नाम कर देती है. इस प्यार में बिना किसी अपेक्षा के केवल समर्पण होता है. पति सोशल पार्टिज में साथ नहीं लेकर जाता, मैरिज एनीवर्सरी याद नहीं रखता, मायके ले जाने की बात को अनसुना कर देता है…लड़की शिकायत भी करती है, लेकिन रात को सोने के बाद सुबह जब उठती है तो फिर किचन में अपनी गृहस्थी के कामों में उलझाए हुए नजर आती है. पति उसे किसी दिन ऑफिस से जल्दी घर आकर सरप्राइज दे दे, बस यही उसके लिए प्यार है. घर से मां गुजिया बनाकर भेज दे या पिता जी कुशल-क्षेम लेने के लिए फोन कर दें….बस वह इतने में ही संतुष्ट हो जाती है. अब तक वह जान चुकी होती है कि सफेद घोड़े पर बैठकर आने वाला राजकुमार केवल सपनों में ही होता है, वास्तविकता में नहीं. अपनी गृहस्थी के घोंसले को सजाने-संवारने के लिए वह हर संभव प्रयास करती है. कुछ इसी तरह समय गुजरता है. पति तरक्की करता है, बच्चे बड़े होते हैं और ऊंचे ओहदों तक पहुंच जाते हैं, लेकिन मन हमेशा उलझा रहता है कि क्या वास्तविक राजकुमार सच में उससे प्यार करता है. क्या उसे यह पता है कि मुझे नॉवेल्स पढऩा पसंद है, उसे मेरा फेवरेट कलर याद होगा क्या, हम पहली बार कब मिले थे उसे अब तक याद होगा……शायद नहीं. समय के साथ लड़की प्रश्नों के जवाब ढूंढना ही बंद कर देती है. बावजूद इसके सपनों का राजकुमार उसके मन के किसी कोने में जिंदा रहता है और वह फिर सारी चिंताएं भूलकर अपने पोते-पोतियों को 'राजकुमार-राजकुमारी' की कहानी सुनाने लगती है.

लक्की कुमार बघेल {तवेरा }
तवेरा -खपरी,गुंडरदेहि