सच्ची दोस्ती के क्या कहने! इस संसार में जन्म के साथ ही माता-पिता, भाई-बहन जेसे रिश्ते स्वयं ही उपलब्ध रहते है! सिर्फ़ शदी ओर दोस्ती का रिश्ता ही आदमी अपनी पसंद के अनुरूप चुनता है! उसमे भी शदी के मामले में धर्म, समाज, अभिभावकों का हस्तछेप रहता है! सिर्फ़ दोस्ती का संबंध ही एक ऎसा सम्बंद है जो धर्म, जाती, समाज, उमर, व लिंग ही बंदिशों से परे एक आदर्श रिश्ता है!

डॉटी की खातिर जान तक लूटा देने के किस्से हमने सुने है!एक विद्वान ने कहा भी है कि,;'आपके दोस्त कौन है? यह देखकर में बता सकता हूँ की आप क्या है! ''यानि दोस्ती इनसान के व्यक्तितव से लेकर उसके कैरियर, चल-चलन, खान-पान से लेकर स्वस्थ्य तक को प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती है! सच्चे दोस्तो की परख मुसीबत के वक्त ही होती है! मगर दोस्ती को बनाए रखने के लिए भी कई तरह कि बातें हमे ध्यान रखना होती है!

अक्सर टीनेजर्स फ्रेंड्स के ग्रुप में आने के बाद अपनी आइडेंटिटी को लूज करने लगते हैं। दरअसल, ग्रुप में पॉप्युलर होने के लिए वे हर बात पर सहमति जता देते हैं। ऐसा न करें, खुद के प्रति ईमानदारी बरतें और किसी और का क्लोन बनने की कोशिश में न रहें।

जो आपके बारे में अफवाहें फैलाते हैं या मजे लेकर सुनते हैं, वे आपके दोस्त नहीं हो सकते। इसलिए आप भी दोस्तों के बारे में गॉसिप न करें। अगर अपने किसी फ्रेंड के बारेमें आपने कुछ शॉकिंग सुना है, तो उससे पर्सनली इस बारे में बात करें।

किसी प्रॉब्लम में पड़ने पर फ्रेंड्स को डिफेंड करें। उसकी थोड़ी-बहुत गलती हो, तब भी उसे फेवर करें। क्योंकि क्लोज फ्रेंडशिप में कंडिशंस नहीं होते। हां, उसकी गलती उसे अकेले में बताएं। लेकिन सबके सामने उसकी सेल्फ-रिस्पेक्ट का ध्यान रखें।

फ्रेंड्स के एक्स से डेट करने से बचें। यही नहीं, जिन पर आपके दोस्तों का क्रश रहा है, या फिर जिन्होंने आपके फ्रेंड को रिजेक्ट किया है, उनसे भी क्लोज न हों। ऐसी सिचुएशन में फ्रेंड की जगह खुद को रख कर सोचें। क्या आपको अच्छा लगेगा कि जिसने आपको चीट किया हो, उससे आपका कोई फ्रेंड घुले-मिले?

अगर आपका फ्रेंड कोई रॉन्ग डिसिजन ले रहा हो, तो उसे सजेशन देने से न चूकें। लेकिन ऐसे में उस पर हावी न हों। चूंकि आपका दोस्त पहले ही उलझन में है, ऐसे में अग्रेसिव होकर कही गई बात उसके गले नहीं उतरेगी। अक्सर अपनी बात थोपने वाले दोस्त को मुंह की खानी पड़ती है। कई बार उलटे उसे ही गलत समझ लिया जाता है। बेहतर होगा कि आप उसे जो भी सजेशन दें, उसके फायदे भी कूल होकर समझा दें।

अक्सर दोस्ती टूटने की वजह यह होती है कि एक फ्रेंड को महसूस होता है कि दूसरे ने जरूरत पड़ने पर मुंह मोड़ लिया। अगर आपके फ्रेंड ने मुश्किल घड़ियों में आपको सपोर्ट किया है, तो आप भी जरूरत पड़ने पर उसे हौसला बंधाने में पीछे न रहें।

सालों बाद भी इमोशनल सपोर्ट हम भूल नहीं पाते। और इसी तरह से फ्रेंड का अकेले छोड़ देना भी याद रह जाता है। इसलिए अपनी अच्छी बातों के लिए फ्रेंड्स की यादों में रहें। साथ ही दोस्ती में पैसे के लेनदेन से दूर रहै!साथ साथ किए जाने वाले खर्चो में भी बराबरी से खर्च करने को तत्पर रहै!मीटर के परिजनों को भी यथेश्थ सम्मान दे!मीटर कि शदाश्य्ता का गलत फायदा ना उठाएँ!