 - पानी पिलाता हूँ भरी गरमी में
जाड़ों में भी और बरसते मेघों में बुझाता हूँ प्यास,अपने जीवन की। मिनरल वाटर या पैकेज्ड वॉटर नहीं है मेरे पास…. पास है ठंडी मशीन,लाल घड़ा नींबू और चंद पत्तियाँ पुदीने की उसी ताज़गी में डूबता हूँ,हर दिन काला नमक और बंटा सोडा ही बुझाते मेरे जीवन की खटास। है यही कारोबार,है यही मेरा सच हर सुबह हूँ निकलता,ले संग पानी और चंद अपनी प्यास की तलाश…. |
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