raazlaxmi

Raazlaxmi Divya mandle | 6:18 AM | | 0 comments »

गाती हुई हाथों में सिंगर की मशीन
कतरों से पसीने के शराबोर जबीन
मसरूफ किसी काम में देखूं जो तुझे
तू और भी मुझको नजर आती है हसीन

पानी कभी दे रही है फुलवारी में
कपड़े कभी रख रही है अलमारी में
तू कितनी घरेलू-सी नजर आती है
लिपटी हुई, हाथ की धुली साड़ी में

अब इसको किफायत कहो या इसका शऊर
औरत का तो ये गुण है सदा से मशहूर
हर तरह की तंगी भी उठा लेगी, मगर
चुपचाप से कुछ बचा के रखेगी जरूर

चुप रह के हर एक घर की परेशानी को
किस तरह न जाने तू उठा लेती है
फिर आए-गए से, मुस्कुरा कर मिलना
तू कैसे हर एक दर्द छुपा लेती है


raazlaxmi mandle

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