कहते हैं कि सादगी के आगे क्या है
काजल की लकीर हो कि गाज़े का गुबार
खिलते हुए होंठ, मुस्कुराती आंखें
औरत का नहीं इससे हसीं कोई सिंगार

वो नार जिसे देश कहिए सौभाग
हर सांस तपस्या, नजर प्रेम का त्याग
जो आग के शोलों से गुज़र सकती है
जो मौत से अपना छीन सकती है सुहाग

कहते हैं कि तू गम को भी दे देती है रूप
घर तक नहीं महदूद तिरा रूप अनूप
जीवन की सुलगती हुई राहों में भी
तू जब साथ चले तो नर्म पड़ जाती है धूप


हमसे भागा न करो, दूर गजलों की तरह
 हमसे भागा न करो, दूर गजलों की तरह
हमने चाहा है तुम्हें चाहने वालों की तरह

खुद-ब-खुद नींद-सी आंखों में घुली जाती है
महकी-महकी है शब-ए-गम तेरे बालों की तरह

तेरे बिन, रात ज्के हाथों पे ये तारों के अयाग
खूबसूरत हैं मगर जहर के प्यालों की तरह

और क्या उसमें जियादा कोई नर्मी बरतूं
दिल के जख्मों को छुआ है तेरे गालों की तरह

गुनगुनाते हुए दर आ कभी उन सीनों में
तेरी खातिर जो महकते हैं सवालों की तरह

मुझसे नजरे तो मिलाओ कि हजारों चेहरे
मेरी आंखों में सुलगते हैं सवालों की तरह

जुस्तजू ने किसी मंजिल पे ठहरने न दिया
हम भटकते रहें आवारा ख्यालों की तरह

जिन्दगी! जिसको तेरा प्यार मिला वो जाने
हम तो नाकाम रहें, चाहने वालों की तरह।

 हमसे भागा न करो, दूर गजलों की तरह
हमने चाहा है तुम्हें चाहने वालों की तरह
खुद-ब-खुद नींद-सी आंखों में घुली जाती है
महकी-महकी है शब-ए-गम तेरे बालों की तरह
तेरे बिन, रात ज्के हाथों पे ये तारों के अयाग
खूबसूरत हैं मगर जहर के प्यालों की तरह
और क्या उसमें जियादा कोई नर्मी बरतूं
दिल के जख्मों को छुआ है तेरे गालों की तरह
गुनगुनाते हुए दर आ कभी उन सीनों में
तेरी खातिर जो महकते हैं सवालों की तरह
मुझसे नजरे तो मिलाओ कि हजारों चेहरे
मेरी आंखों में सुलगते हैं सवालों की तरह
जुस्तजू ने किसी मंजिल पे ठहरने न दिया
हम भटकते रहें आवारा ख्यालों की तरह
जिन्दगी! जिसको तेरा प्यार मिला वो जाने
हम तो नाकाम रहें, चाहने वालों की तरह।


कौन रोता है किसी और की खातिर..
  ........कभी खुद पे कभी हालात पे रोना आया
बात निकली तो हर एक बात पे रोना आया

हम तो समझे थे कि हम भूल गए हैं उनको
क्या हुआ आज, यह किस बात पे रोना आया

किस लिए जीते हैं हम किसके लिए जीते हैं
कई बार ऐसे सवालात पे रोना आया

कौन रोता है किसी और की खातिर ए दोस्त!
सबको अपनी ही किसी बात पे रोना आया

एक तो नैनां कजरारे और तिस पर डूबे काजल में
बिजली की बढ़ जाए चमक कुछ और भी गहरे बादल में

आज ज़रा ललचायी नज़र से उसको बस क्या देख लिया
पग-पग उसके दिल की धड़कन उतर आई पायल में

प्यासे-प्यासे नैनां उसके जाने पगली चाहे क्या
तट पर जब भी जावे, सोचे, नदिया भर लूं छागल में

गोरी इस संसार में मुझको ऐसा तेरा रूप लगे
जैसे कोई दीप जला दे घोर अंधेर जंगल में

प्यार की यूं हर बूंद जला दी मैंने अपने सीने में
जैसे कोई जलती माचिस डाल दे पीकर बोतल में

BY:- Raja mandle
village- arjunda nagar
mo. -8435705078