बेडियाँ
उलझे है सभी अपनी ही बेड़ियों में,
दूजो की बेड़ियों से फिर भी खफा है,
डाल बेड़ियाँ दूजो के कदमो में,
हर कोई देखो मुश्कुरा रहा है,
लेकिन भूल सब गए की
दूसरा छोर खुद से बंधा है
आसमां पाने की आतुरता में,
दूजो को बेड़ियों में जकड़ दिया,
पंख फडफडा कर देखो यारों,
खुद तुम्हारे पैरों में कितनी बेड़ियाँ है|
अम्बर पर राज है उनका ,
जिनके साथ ज़माना चला है,
अकेला अम्बर पर अंकित ,
ना किसी का नाम हुआ है ,
छोड़ अपनी नीव ना कोई ,
पवन वेग से लड़ सका है ,
बढने की ख्वाहिश से पहले यारो ,
देखो तुम्हारे पैरों में कितनी बेडियाँ है