दिव्या मंडले

परीक्षाओं का मौसम है आया
पाठ्यक्रम ने बहुत डराया।

सुबह-सवेरे स्कूल जाऊं
सांझ ढले घर को आऊं।

भागते-भागते कोचिंग जाऊं
लस्त-पस्त फिर घर को आऊं।

मगर हाय रे दुर्भाग्य
अंक फिर भी न अच्छे पाऊं।

पापा को कैसे रिझाऊं?
भैया को कैसे समझाऊं?

मेरी विनती, सुन लो भगवान
मैं करती हूं आपका वंदन।

संकट से मुझे उबार लो
कंप्यूटर की भांति एक्स्ट्रा मेमोरी डाल दो।