खता अश्को की सलामी देकर हम, उनकी राहों से विदा हो जाते, फिर ना कोई राह मिला दे, इस खातिर चलना छोड़ देते, उनके एक अश्क मोती से कम, कीमत है इस जान की , मांग कर तो देखते एक बार, मुश्कुराते हुए अर्थी पर लेट जाते बेशक हमे प्यार जताना आता नहीं, मगर वे हमारे आसूं ही पढ़ लेते|
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