होती है बड़ी प्यारी मां,
होती है सबसे न्यारी मां।
सुख सारे देकर हमको,
दुःख सारे ढोती है मां।
ममता का सागर है मां,
अंबर-सा मां का विस्तार है।
त्याग मूर्ति है प्रकृति-सी,
धरती-सा मां का प्यार है।
सदा प्यार हमको देती है मां,
दयालु बहुत होती है मां।
दुःख जरा भी हो हमें तो,
सुबक-सुबक रोती है मां।
मां-सा कोई न दूजा जग में,
मां नदियों-सी बहती है।
मां की सेवा करने वालों को,
कोई कमी नहीं रहती है।
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