मानवता

 
 

मानवता की देख हालत
पत्थर-पत्थर रोता है
जीवन में हर घटना के पीछे
इक सदस्य छुपा होता है।
आंसू और आहों का रिश्ता
जब सिसकी से होता है
गम का दरिया बहकर
आंसू का सागर होता है
कत्ल किसी का हुआ सड़क पर
राजा महल में सोता है।