Gessner Beer Brewery

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 तुम पे क्या बीत गई, कुछ तो बताओ
मैं कोई गैर नहीं हूं कि छुपाओ

इन अंधेरों से निकलने की कोई राह देखो
खून-ए-दिल से कोई मशाल जलाओ

एक भी ख्वाब न हो जिसमें वो आंखें क्या हैं
इक न एक ख्वाब तो आंखों में बसाओ

बोझ दुनिया का उठाउंगी  अकेले कब तक
हो सके तुम से तो कुछ हाथ बटाओ

जिंदगी यूं तो न बाहों में चली आएगी
गम-ए-दौरा के ज़रा नाज़ तो  उठाओ

उम्रभर कत्ल हुआ हूं मैं तुम्हारी खातिर
आखिरी वक्त तो सूली न तो चढ़ाओ

और कुछ देर तुम्हें देख के जी लूं ठहरो
मेरी बगल से अभी उठ के न तो जाओ

आपकी :- दिव्या मंडले