थकी जिंदगी की ख्वाहिश
कभी जिंदगी मुस्कुराती थी
कभी जिंदगी रुलाती थी
कभी धुप-छाँव से खेलाती थी
पार आज एक ख़ामोशी है
तन्हाई के आगोश में
खुद सहारे को तरसती
रेत के घरोंदे को तकती
कुछ नहीं बस इन्तेज़ार
कब बदलते मौसम में
यह पलकें नैनो का
पर्दा करना बंद कर दे|
यादों के सागर में खोयी
खुद ही के भंवर में गुम
खुद के वारो से हो घायल
थके राही सी मायूसी लिए
हर पल बस यही दुआ
कुछ खुशहाल यादों की
तस्वीर कर खुद पर अंकित
यह पलकें नैनो का
पर्दा करना बंद कर दे|
बिन मकसद बिन राह,
बिन किसी ख्वाहिश अब,
रिश्तों की रेशमी डोरियों की ,
मजबूरी के बंधनों में बंधे,
कुछ टूटे रेशमी धागों में ,
कुछ खोजती कुछ सोचती,
लिए इंतज़ार संग की आखिर ,
कब ख़ामोशी को तोड़,
यह पलकें नैनो का
पर्दा करना बंद कर दे
0 comments
Post a Comment