मां की याद ऐसे आती है जैसे आती है महक बाग के किसी कोने से कोने में खिले किसी फूल से जैसे आती है माटी-गंध आषाढ़ की पहली बारिश में आंगन की भीगी हुई काली मिट्टी से- ठीक ऐसे ही आती है मां की याद जो अब रही नहीं इस दुनिया में मेरे लिये मां की याद मां का इस दुनिया में होना है !
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