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  • खुद अपनी पहचान से अंजान हूँ मैं,
    अपनी पहचान आपसे करवाऊँ कैसे ??
    कुछ सिमटी हुई छोटी सी दूनिया है मेरी ,
    इस दिल की गहराइयों में आपको ले जाऊं कैसे ??
    आसमान की ऊँचाइयों तक मेरे ख्वाब बिखरे हैं ,
    अपने अरमानों की हद आपको दिखाऊँ कैसे ??
    मुस्कुराना मेरी आदत है आंसुओं को छुपा कर ,
    पर हर ग़म को अपनी हसी से बहलाऊँ कैसे ??
    दोस्ती ही मेरी चाहत है और दोस्त मेरी ज़िन्दगी ,
    इश्क से अपनी बेरुखी का सबब बताऊँ कैसे ??
    होकर मेरी सरहदों में शामिल आप ही जान लो मुझे ,
    किस्सी और तरह आपको खुद से मिलवाऊँ कैसे ??

 

  • इस तरह तू हवा की वकालत न कर,
    देख, दुनिया की ऐसे अदावत न कर।

    आसमाँ से तेरी दोस्ती क्या हुई,
    सोच अपनों की ऐसे खिलाफत न कर।

    चाँद तारों की ऐसे खिलाफत न कर,
    धूप सूरज की ऐसे खिलाफत न कर।

    ठीक है तेरी दौलत की गिनती नही,
    क्या पता है समय का दिखावट न कर।

    हाथ में तेरे बेशक है ताकत सही,
    गैब से थोडा डर तू शरारत न कर।

    प्यार के बोल मीठे हैं अनमोल हैं,
    और इस के सिवा तू लिखावट न कर।

    जान ले तेरे प्रीतम की मूरत है क्या
    छोड़ दे और चीजें इबादत न कर।

  • तेरा चेहरा है आईने जैसा – (2)
    क्यूँ ना देखु है देखने जैसा
    तेरा चेहरा है आईने जैसा

    तुम कहो तो मैं पुछ लूँ तुमसे – (2)
    है सवाल एक पुछने जैसा – (2)
    तेरा चेहरा है आईने जैसा

    दोस्त मिल जाएँगे कई लेकिन – (3)
    ना मिलेगा कोई मेरे जैसा – (2)
    तेरा चेहरा आईने जैसा

    तुम अचानक मिले थे जब पहले – (3)
    पल नही है वो भूलने जैसा – (2)
    तेरा चेहरा है आईने जैसा

  • जिंदगी में कभी कभी ऐसे लोग मिल जाते है कि .........ऊपर वाले ने कोई रिश्ता तो नहीं लिखा उनके साथ मगर हम उसको दोस्ती कह देते है .........और ये रिश्ता है जो हर इंसान को चाहिए भले ही उसके पास दुनिया के सब रिश्ते सब नाते, सब सुख, हर शोहरत हो मगर .......कभी कभी जिंदगी ऐसे मोड़ पे आ जाती है कि ....अपना दुःख किसीको कहने का मन करता है और बेतलब ही.......जो बस सुकून से सुन ले और एक दिलाशा भर दे दे .....और कह दे में तुम्हारे साथ हूँ ........एक जीवन सा मिल जाता है खुद से लड़ते हुए इंसान को ..........बस उन दो दोस्तों को नजर ना लगे उस दोस्ती को नजर न लगे, ना ही कभी एक दुसरे के मन में कोई स्वार्थ आयें .........शायद यही होती होगी दोस्ती .......कोशिश तो हमने भी की मगर जैसे इस दुनिया में सब कुछ है एक दोस्त नहीं .....है भी तो अभी वो एहसास नहीं हुआ ।
  • मानवता की देख हालत
    पत्थर-पत्थर रोता है
    जीवन में हर घटना के पीछे
    इक सदस्य छुपा होता है।
    आंसू और आहों का रिश्ता